آخـــر ايـــن نــالــة ســـوزنـــده اثـــرهـــا دارد | شــب تـــاريـــك فـــروزنـده سحرها دارد |
غـافـل از حــال جگــر ســوختة عشـق مباش | كــــه در آتشكــدة سينــه شــررها دارد |
نالـه سـر ميزنـــد از هــر بن مويم چون ني | بــه اميــدي كــه دهــان تـو شكرها دارد |
تــــو در آيينـــه نظــــر داري و ز آن بيخبـــــري | كــه بــه رخســار تـــو آيينــه نظرها دارد |
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در خــور نـــاوك آن تــرك كمـان ابــرو كيست؟ | آنكــه از سينــة صـــد پــاره سپرها دارد |
تــو پسنـــد دل صــــــاحبــنظـــراني، ورنـــــه | مـــادر دهـــر بــه هر گوشه پسرها دارد |
تيــره شـد روز «فروغي»، به ره عشق مهي | كــه نهـــان در شكــن طــره قمـرها دارد |
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دل در انـــديشة آن زلـــف گـــرهگيـــر افتـــاد | عـــاقــلان مـژده كه ديوانه به زنجير افتاد |
خـواجه، هي منع من از باده پرستي تا كي؟ | چــه كنـــد بنــده كه در پنجة تقدير افتاد! |
دامــــنش را ز پــي شكـــوه گـــرفتــــن روزي | كــه زبــان از سخــن و نطق ز تقدير افتاد |
گفتـــم از مسئلـــة عشـــق نـويسم شرحي | هــم ز كــف نــامه و هـم خامه ز تحرير افتاد |
دلبــــــر آمـــد پــي تعميــــــر دل ويــــــرانـــم | ليكــن آن وقــت كـــه اين خانه ز تعمير افتاد |
نـــامي از جلـــوة خـــورشيد جهـان آرانيست | گوئيــا پــرده از آن حســن جهـانگير افتاد |
پــري از شـــرم تـــو از چشم بشر پنهان شد | قمــر از رشــگ تــو از بــام فلك زيـر افتاد |
دل ز گيســوي تو بگسست و به ابرو پيوست | كــار زنجيــري عشق تو به شمشير افتاد |
بــس كـــه بـــر نـــالة دل گــوش نـدادي، آخر | هــم دل از نــاله و هــم نـاله ز تأثير افتاد |
گفــت زودت كشم آن شوخ، «فروغي» و نكشت | تـا چه كردم كه چنين كار به تأخير افتاد!؟ |
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شاهد به كام و شيشه به دست و سبـو به دوش | مستـــانــه مي روم ز در پيـــر ميفــروش |
خـــواهي كه كـــان دل ببــري لعل وي ببوس | خــواهي كه نيش غم نخوري جام مي بنوش |
مائيـــم و كـــوي عشـق و دروني پر از خراش | مــائيم و بــزم شــوق و دهاني پر از خروش |
داني كه داد بلبل شيـدا ز دســت كيـــست؟ | از دســت آنكـــه كــرد لــب غنچه را خموش |
پنــد كسي چگـــونه نيــوشـــم كه آب دو لب | از مــن گرفتــه انــد دو گــوش سخـن نيوش |
گــرچشم فيـــض داري از آن چشمـــة كـــرم | اي دل به سينه خون شو واي چشم تو بجوش |
مـــن والـــه جمـــال تـــو بــا صد هـزار چشم | مــن بنــدة خطــاب تــو بــا صدهــزار گــوش |
بــي جهد از آن دهان نرسد هيچ كس به كام | تـا هست ممكن تو « فروغي»، به جان بكوش |
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كي رفتـــه اي ز دل كـــه تمنــــا كنــم تــرا | كسـي بــوده اي نهفتــه كـه پيدا كنم ترا |
غيبــت نكـــرده اي كـــه شوم طالب حضور | پنهــان نگشتــه اي كــه هــويــدا كنم ترا |
بـــا صـــد هـــزار جلـــوه برون آمدي كه من | بــا صـــد هـــزار ديـــده تمــاشــا كنم ترا |
مستـــانه كـــاش در حــرم و ديــر بگـــذري | تـــا قبلـــه گـــاه مؤمــن و تـرسـا كنم ترا |
خـــواهم شبـــي نقـــاب ز رويــت برافـكنـم | خـــورشيــد كعبـــه، مــاه كليسـا كنم ترا |
گـــر افتـــاد آن دو زلــف چليپـا به چنگ من | چنــديـــن هـــزار سلسلـــه در پا كنم ترا |
طــوبي و ســدره گر به قيامت به من دهند | يكجــــــا فــداي قـــامــت رعنــــا كنم ترا |
زيبـا شود بـــه كارگـــه عشــق كـــار مــن | هـرگــه نظـــر بـــه صـــورت زيبــا كنم ترا |
رســـواي عــالمي شدم از شور عــاشقي | تــــرسم خــدا نخـــواستــه رسوا كنم ترا |
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دوش در آغــوشــم آمـــد آن مــه نخشب | كــاش كه هرگز سحر نمي شدي اين شب |
مهـــوشــي از مهــر در كنـــار مــن آمـــد | چــون قمـــر انـــدر ميـــان خــانـه عقرب |
عشــق بـــه جـــايي مــرا رساند كه آنجا | گـــردش گــردون نبــود و تــابش كــوكب |
هســت بســي تــا هــواي كعبــة مقصود | كـوشش راكب خوش است و جنبش مركب |
تــا كـــرم ســـاقي اســت و بــادة بــاقي | كـــام دمــــادم بگيـــــر و جــــال لبـــــاب |
لاف تقـــرب مـــزن بــــه حضـــرت جـــانــان | زآنكــــه خمـــوشنـــد بنــدگـــان مقـــرب |
هــم دل خســرو شكــست و هـم سر فرهاد | عشــوة شيــريــن تنــدخـــوي شكــر لب |
آنكــه خبــــردار شـــد ز مسئلـــة عشــق | كــار نــدارد بـــه هيــچ ملــت و مــذهــب |
روز مـــرا تيـــره ســـاخـــت جعـــد معنبــر | زخــم مـــرا تـــــازه كـــرد عنبــر اشهــب |
هيــــچ مـــــرادم نـــــداد خـــوانـــدن اوراد | يــــار نشــد مهــربـــان ز گفتـــن يـــا رب |
سيمبـــران طــالـــب زرنـــد« فـــروغــي » | جيــــب ملــك دارد ايـــن دعـــاي مجــرب |